Regular Employees Good News : प्रदेश के नियमित कर्मचारियों के लिए सरकार ने ऐसा फैसला लिया है, जिसका असर आने वाले सालों तक देखने को मिलेगा। बरसों से चले आ रहे स्थायी-अस्थायी के फर्क पर अब विराम लगाने की तैयारी हो चुकी है। कैबिनेट बैठक में लिया गया यह निर्णय कर्मचारियों के लिए राहत की खबर बनकर आया है।
स्थायी–अस्थायी का झंझट हुआ खत्म
प्रदेश सरकार ने 1960 के शासकीय सेवक (अस्थायी एवं अर्ध-स्थायी सेवा) नियम को खत्म करने का फैसला कर लिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब नियमित सेवा में काम कर रहे कर्मचारियों को अलग-अलग श्रेणियों में नहीं बांटा जाएगा। स्थायी और अस्थायी का भेद समाप्त होगा और सभी नियमित कर्मचारी स्थायी माने जाएंगे। यह फैसला वित्त विभाग के प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया।
कर्मचारियों को क्या मिलेगा सीधा फायदा
इस बदलाव से सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि परिवीक्षा अवधि पूरी होने के बाद स्थायीकरण में होने वाली देरी अब नहीं होगी। अब कर्मचारियों को समय पर वेतनवृद्धि और अन्य सेवा लाभ मिल सकेंगे। वित्त विभाग के मुताबिक मंत्रालय सेवा समेत कई विभागों में अब तक दो से पांच प्रतिशत कर्मचारी अस्थायी श्रेणी में थे। इसी वजह से उन्हें प्रतिनियुक्ति, अन्य सेवाओं में अवसर और कई बार अवकाश जैसी सुविधाओं से भी वंचित रहना पड़ता था।
नियमों की उलझन और कोर्ट के मामले
हकीकत यह थी कि सीमित अवधि की परियोजनाओं को छोड़ दिया जाए, तो स्थायी और अस्थायी पदों में पात्रता, सेवा शर्तों और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली सुविधाओं में कोई बड़ा अंतर बचा ही नहीं था। फिर भी अलग-अलग नियमों के कारण विभागों को इन्हें लागू करने में परेशानी आती थी और कई मामले अदालत तक पहुंच जाते थे। इन्हीं व्यावहारिक दिक्कतों को देखते हुए सरकार ने यह भेद पूरी तरह खत्म करने का फैसला किया है।
कार्यभारित और आकस्मिक पदों पर भी फैसला
कैबिनेट बैठक में एक और अहम निर्णय लिया गया। निर्माण विभागों में कार्यभारित और आकस्मिकता के पदों को समाप्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। सरकार का कहना है कि अब बड़े निर्माण कार्य विभागों के बजाय एजेंसियों के माध्यम से कराए जा रहे हैं, इसलिए ऐसे पदों की जरूरत नहीं रह गई है। हालांकि इस पर सामान्य प्रशासन विभाग ने आपत्ति जताई थी, लेकिन चर्चा के बाद वित्त विभाग के तर्कों को स्वीकार कर लिया गया। सरकार ने यह भी साफ किया है कि पात्र कर्मचारियों के नियमितीकरण और न्यायालय के आदेशों के पालन में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी।
